सार........
⭕ चंद्रग्रहण के कारण 4 मार्च को मनेगी होली, 2 मार्च को होगा होलिका दहन।
⭕ खग्रास चंद्रग्रहण का असर: एक दिन बाद मनाया जाएगा रंगोत्सव।
⭕ सूतक काल के कारण 3 मार्च को नहीं मनाई जाएगी होली।
⭕ आचार्य अजय शुक्ल ने बताई होली और ग्रहण की तिथियां।
⭕ ज्योतिषीय गणना अनुसार 4 मार्च को होगा रंगोत्सव।
⭕ भद्रा पुच्छ काल में होगा होलिका दहन, एक दिन बाद रंगों का पर्व।
⭕ ग्रहण की छाया में होली: तिथि में हुआ बदलाव।
⭕ खग्रास चंद्रग्रहण के चलते बदला होली का पर्व कैलेंडर
सूतक प्रभाव के कारण 4 मार्च को मनेगी होली।
⭕ शास्त्रीय मान्यता के अनुसार तय हुआ होली का नया दिन।
विस्तार........
सलेमपुर/देवरिया। प्रेम, उत्साह और उमंग का प्रतीक रंगों का महापर्व होली इस वर्ष पारंपरिक तिथि से एक दिन बाद मनाया जाएगा। खग्रास चंद्रग्रहण के कारण रंगोत्सव 3 मार्च के स्थान पर 4 मार्च को मनाया जाएगा। यह जानकारी क्षेत्र के ज्योतिषाचार्य आचार्य अजय शुक्ल ने दी।
आपको बता दें कि, आचार्य शुक्ल ने बताया कि, इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च, सोमवार को किया जाएगा। हालांकि 2 मार्च की संध्या से 3 मार्च की प्रातः 4 बजकर 56 मिनट तक भद्रा काल रहेगा। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार भद्रा काल में कोई भी शुभ अथवा मांगलिक कार्य करना वर्जित माना गया है। ऐसे में होलिका दहन या तो भद्रा समाप्ति के बाद अथवा भद्रा के पुच्छ काल में ही किया जाना चाहिए।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार होलिका दहन के लिए रात्रि 12 बजकर 50 मिनट से 2 बजकर 2 मिनट तक का समय सर्वाधिक अनुकूल रहेगा। यह अवधि कुल 1 घंटा 12 मिनट की है, जिसे भद्रा का पुच्छ काल माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यही समय होलिका दहन के लिए श्रेष्ठ और शुभ फलदायी है।
आचार्य शुक्ल ने बताया कि, 3 मार्च को पूरे देश में खग्रास चंद्रग्रहण दिखाई देगा। ग्रहण की शुरुआत दोपहर 3 बजकर 21 मिनट से होगी और यह सायं 6 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। ग्रहण का सूतक काल प्रातः 6 बजकर 20 मिनट से प्रारंभ होकर सायं 6 बजकर 46 मिनट तक प्रभावी रहेगा। सूतक काल में पूजा-पाठ, शुभ कार्य और मांगलिक कार्यक्रमों का निषेध होता है। इसी कारण रंगोत्सव का पर्व होली 4 मार्च, बुधवार को धूमधाम से मनाया जाएगा।
उन्होंने सावधानियां बताते हुए कहा कि, सूतक काल में भोजन को ढककर रखना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए तथा परंपरा के अनुसार कुक्षि पर गेरू (गैरिक) का लेप लगाकर घर के भीतर ही रहना उचित माना गया है। ग्रहण को कभी भी नग्न आंखों से नहीं देखना चाहिए तथा इस अवधि में कोई भी नवीन या शुभ कार्य प्रारंभ नहीं करना चाहिए।
क्षेत्रवासियों से अपील की गई है कि, वे शास्त्रीय परंपराओं का पालन करते हुए त्योहार मनाएं और आपसी सौहार्द, प्रेम व सद्भाव बनाए रखें।

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