रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: महराजगंज क्षेत्र की पावन धरा कुशलगंज मजरे अलीपुर में आयोजित त्रिदिवसीय श्री रामचरितमानस सम्मेलन का समापन दिवस भक्ति, ज्ञान और आत्मचिंतन की पावन गंगा में अवगाहन का अद्भुत अवसर बन गया। संत-मनीषियों की ओजस्वी वाणी और श्रोताओं की श्रद्धा ने वातावरण को दिव्यता से आलोकित कर दिया।
आपको बता दें कि, प्रथम वक्ता के रूप में अवधी सम्राट हरिनारायण तिवारी ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों का स्मरण कराते हुए कहा कि, सांसारिक कर्मों में रत रहते हुए भी यदि मन निरंतर भगवद्-नाम के उच्चारण में रमा रहे, तो वही साधना जीवन-मुक्ति का सरलतम मार्ग बन जाती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि, नाम-स्मरण केवल जप नहीं, अपितु जीवन का श्वास बन जाना चाहिए—ऐसा मंत्र जो भवसागर से पार उतार दे।
शिव-विवाह की मंगलमयी छटा: भोलेनाथ पशुपतिनाथ की पावन धरती से पधारे नेपाली बाबा ने शिव-विवाह की झांकी को इतने मनोहर और भावप्रवण अंदाज में प्रस्तुत किया कि, श्रोता तालियों से सभागार गुंजायमान कर उठे। बारातियों की आवभगत का वर्णन करते हुए उन्होंने भक्ति में हास्य और रस का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया।
दमोह (मध्य प्रदेश) से पधारे सूरदास पवन जी ‘मनु महाराज’ ने शिव-विवाह के अगले सोपानों का सरस वर्णन करते हुए कथा को भावनात्मक ऊँचाइयों तक पहुंचाया। उनकी वाणी में भक्ति की गहराई और शास्त्रीय सौंदर्य का अद्भुत संगम झलकता रहा।
मातृ-चरित्र और त्याग की महिमा: बुंदेलखंड (बांदा) से आए यज्ञेश मिश्र ने माता कौशल्या के पावन चरित्र का अत्यंत मार्मिक चित्रण किया। उन्होंने राम के वनगमन प्रसंग को दार्शनिक दृष्टि से प्रस्तुत करते हुए बताया कि, त्याग और सत्य के पथ पर चलना ही धर्म का वास्तविक स्वरूप है।
उन्होंने कहा—धर्म का मार्ग सरल प्रतीत नहीं होता, क्योंकि यह सत्य, संयम और नैतिकता की मांग करता है। यह मार्ग कांटों से भरा अवश्य है, परंतु अंततः आत्म-साक्षात्कार की ओर ले जाता है। अधर्म का पथ भले ही आकर्षक लगे, पर उसका अंत पतन और विनाश में ही होता है।
राष्ट्रभाव और सामाजिक चेतना का संगम: इटावा से पधारे राघवकिशोर जी रामायणी ने राष्ट्र वंदन के साथ रामकथा की ओजस्वी प्रस्तुति देते हुए उपस्थित जनसमूह को जीवन-पथ पर मानस से प्रेरणा लेने का संदेश दिया।
अयोध्या धाम से पधारे क्रांतिकारी उद्घोषक बाल भरत जी ने सामाजिक विसंगतियों पर प्रखर स्वर में चिंतन प्रस्तुत किया। उन्होंने कथा के क्रम में यह संदेश दिया कि—
“डोंगी संत, क्रोधी ससुर, लोभी भूप, विरोधी भाई,
पूत कपूत, लड़ाकू पड़ोसी, नीच संग सदा दुखदाई…”
इस माध्यम से उन्होंने सत्संग के महत्व और कुसंग के दुष्परिणामों को स्पष्ट किया। उनका संदेश था कि, जीवन में संगति का चयन ही सुख-दुःख का निर्धारक बनता है।
धर्ममार्ग: कठिन किन्तु कल्याणकारी: सम्मेलन का मूल संदेश यही रहा कि, धर्म का मार्ग भले ही कठिन और परीक्षाओं से युक्त हो, परंतु वही शाश्वत शांति और आत्मिक संतोष प्रदान करता है। सत्संग, नाम-स्मरण और आदर्श आचरण से ही जीवन का वास्तविक कल्याण संभव है।
इस पावन अवसर पर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अवधेश बहादुर सिंह, पूर्व विधायक रामलाल अकेला, भाजपा नेता विद्यासागर अवस्थी, ज्योति प्रकाश अवस्थी एडवोकेट, भाजपा मंडल अध्यक्ष अमित श्रीवास्तव, प्रधान संघ अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह उर्फ दद्दू, समाजिक कार्यकर्ता राजकुमार सिंह उर्फ मोंगा, राकेश त्रिवेदी उर्फ आलू महाराज,
प्रेस क्लब महराजगंज के अध्यक्ष मुकेश श्रीवास्तव, डॉक्टर अशोक मिश्रा, विनोद अवस्थी, रविराज सिंह, संजय मोहन त्रिवेदी, रिंकू चौधरी, उमेश द्विवेदी, उमाकान्त पाण्डेय, शत्रोहन सोनी, संजय मिश्रा, गणेश द्विवेदी, महेश सिंह, संजय मिश्रा, पूर्व प्रधान रविराज सिंह, महेन्द्र श्रीवास्तव, विनोद बाजपेई, देव नारायन पाण्डेय,
प्रदीप चौरसिया, सुरेश द्विवेदी, उपजिलाधिकारी गौतम सिंह, क्षेत्राधिकारी प्रदीप कुमार सहित अनेक गणमान्य नागरिक और सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। श्रद्धा, भक्ति और ज्ञान का यह संगम ग्राम कुशलगंज की आध्यात्मिक चेतना में नई ऊर्जा संचारित कर गया।
कार्यक्रम का कुशल संचालन प्रवीण कुमार त्रिपाठी ने किया।














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