रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: ग्रामीण अंचल में सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं होती, बल्कि वह विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों की जीवनरेखा होती है। महराजगंज तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत जमुरावां प्राथमिक विद्यालय से नैनिया सिरसोई तक जाने वाला लगभग ढाई किलोमीटर लंबा डामरीकृत मार्ग इसका सजीव उदाहरण है, जो तीन दशकों के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर नवजीवन पाने जा रहा है।
      आपको बता दें कि, यह वही मार्ग है, जिसका निर्माण वर्ष 1996 में तत्कालीन विधायक श्याम सुंदर भारती के प्रयासों से हुआ था। समय के साथ उपेक्षा और रखरखाव के अभाव में यह सड़क जर्जर होती चली गई। गड्ढों और ध्वस्त परतों के कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा के आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बरसात के दिनों में स्थिति और भी विकट हो जाती थी—स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों, किसानों और व्यापारियों के लिए यह मार्ग किसी चुनौती से कम नहीं था।
सामाजिक सरोकार से जुड़ा मुद्दा: सड़क का पुनर्निर्माण केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकार से जुड़ा विषय है। एक सुदृढ़ मार्ग से—शिक्षा तक पहुंच आसान होती है, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता तेज़ होती है, किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में सुविधा मिलती है, और स्थानीय व्यापार व रोजगार को प्रोत्साहन भी मिलता है।
     ग्रामीणों के अनुसार, लंबे समय से इस मार्ग की दुर्दशा उनके विकास में बाधा बनी हुई थी। कई बार शिकायतें हुईं, पर समाधान नहीं निकला। ऐसे में जब वर्तमान विधायक श्याम सुंदर भारती (समाजवादी पार्टी) के समक्ष यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया, तो उन्होंने इसे विधानसभा में बार-बार उठाकर स्वीकृति दिलाने का प्रयास किया।
जनप्रतिनिधि और जनसहभागिता की भूमिका: जमुरावां निवासी एवं विधायक प्रतिनिधि अमित त्रिपाठी उर्फ मोनू ने ग्रामीणों की मांग को प्राथमिकता से विधायक तक पहुंचाया। जनसुनवाई और संवाद की इसी प्रक्रिया ने इस कार्य को गति दी। अंततः लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा मार्ग के नवीनीकरण की स्वीकृति प्रदान की गई और वर्तमान में दोनों पटरियों पर जेसीबी मशीनों से मिट्टी भराई का कार्य जारी है।
     प्राप्त जानकारी के अनुसार, मिट्टी भराई के बाद बड़ी गिट्टी डालकर उसे पूरी गुणवत्ता के साथ दबाया जाएगा और फिर डामरीकरण किया जाएगा, ताकि सड़क टिकाऊ और मानक के अनुरूप बने।
30 वर्षों बाद वही जनप्रतिनिधि, नई पहल: ग्रामीणों के बीच एक चर्चा यह भी है कि, तीन दशक पूर्व जिस विधायक के प्रयासों से यह मार्ग बना था, आज उसी जनप्रतिनिधि के प्रयासों से इसका पुनर्निर्माण हो रहा है। इसे कोई क्षेत्र का सौभाग्य कह रहा है, तो कोई विडंबना। किंतु इतना तय है कि, लंबे “विकास-वनवास” के बाद ग्रामीणों को नई उम्मीद मिली है।
     ग्रामीणों—लल्ला नेता, जयंत, परसू, आशीष मौर्य, अरुण मौर्य, आशीष मिश्रा, पूर्व प्रधान मन्साराम, धर्मपाल, रामबरन और वर्तमान ग्राम प्रधान अनुराग कुमार—ने विधायक के प्रयासों को सराहनीय बताया है। उनका कहना है कि, यह सड़क क्षेत्र के विकास की रीढ़ साबित होगी।
आगे की चुनौती: हालांकि, सामाजिक दृष्टि से यह भी आवश्यक है कि, सड़क निर्माण के साथ-साथ उसकी नियमित देखरेख और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में यह मार्ग फिर उपेक्षा का शिकार न हो। ग्रामीण विकास की वास्तविक कसौटी केवल निर्माण नहीं, बल्कि स्थायित्व और गुणवत्ता है।
      इस मार्ग का पुनर्निर्माण न केवल आवागमन को सुगम बनाएगा, बल्कि यह संदेश भी देगा कि, जनप्रतिनिधियों और जनता के बीच संवाद कायम रहे तो विकास की राह अवरुद्ध नहीं होती।
      तीस वर्षों के इंतजार के बाद मिली यह सौगात, क्षेत्र के लिए नई सुबह की तरह है—जहां सड़क केवल पथ नहीं, बल्कि प्रगति का प्रतीक बनकर उभर रही है।