रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: ग्रामीण अंचल में शिक्षा की अलख जगाने की एक सराहनीय पहल क्षेत्र के सिकंदरपुर गांव में देखने को मिली। समाजसेवी बाबा राम केवल अनशनकारी ने होली पर्व के शुभ अवसर से पूर्व ग्राम पंचायत के बच्चों को जेमेट्री बॉक्स वितरित कर शिक्षा के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। उनका मानना है कि, शिक्षित समाज ही सशक्त राष्ट्र की नींव रखता है। इस दौरान भावी प्रधान प्रत्यासी धर्मराज रावत भी मौजूद रहे।
आपको बता दें कि, एक बातचीत के दौरान बाबा राम केवल अनशनकारी ने कहा कि, आज के बच्चे ही देश का भविष्य हैं। यदि वर्तमान पीढ़ी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आवश्यक संसाधन मिलें, तो वे आगे चलकर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि, समाज की उन्नति का मार्ग विद्यालयों से होकर ही गुजरता है।
शिक्षा स्तर में गिरावट पर चिंता: बाबा राम केवल अनशनकारी ने वर्तमान समय में शिक्षा के स्तर में आ रही गिरावट पर भी चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि, ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों की कमी, अभिभावकों की आर्थिक स्थिति और जागरूकता के अभाव के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। ऐसे में यदि समाज के जागरूक लोग आगे आकर छोटी-छोटी पहल करें, तो बड़े परिवर्तन की आधारशिला रखी जा सकती है।
जेमेट्री बॉक्स जैसे शैक्षिक सामग्री का वितरण केवल वस्तु प्रदान करना नहीं, बल्कि बच्चों के मन में पढ़ाई के प्रति उत्साह और आत्मविश्वास भरना है। कई बच्चों के लिए यह सामग्री आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाती, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। इस पहल से बच्चों के चेहरों पर मुस्कान और मन में नई ऊर्जा देखने को मिली।
पर्व के साथ जुड़ा सामाजिक संदेश: होली जैसे सामाजिक समरसता के पर्व से पूर्व इस प्रकार का आयोजन यह संदेश देता है कि, रंगों का यह त्योहार केवल उत्सव नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम भी बन सकता है। शिक्षा रूपी रंग से जब बच्चों का भविष्य संवरता है, तभी त्योहारों का वास्तविक अर्थ सार्थक होता है।
आगे भी जारी रहेगी पहल: बाबा राम केवल अनशनकारी ने बताया कि, यह पहल यहीं तक सीमित नहीं रहेगी। भविष्य में भी वे समय-समय पर पठन-पाठन सामग्री वितरित करते रहेंगे, ताकि गांव के बच्चे संसाधनों के अभाव में शिक्षा से वंचित न रहें। उनका लक्ष्य है कि, क्षेत्र का हर बच्चा पढ़-लिखकर एक जागरूक, जिम्मेदार और आदर्श नागरिक बने।
ग्रामीण परिवेश में इस प्रकार की सामाजिक पहलें न केवल शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार करती हैं, बल्कि सामुदायिक भागीदारी को भी मजबूत करती हैं। यदि समाज का प्रत्येक सक्षम व्यक्ति एक-एक बच्चे की शिक्षा का दायित्व उठाने का संकल्प ले, तो निश्चित ही विकासखंड से लेकर जनपद, प्रदेश और राष्ट्र तक प्रगति की नई इबारत लिखी जा सकती है।



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