रजनीकांत अवस्थी 
महराजगंज (रायबरेली)। तहसील क्षेत्र के राजस्व ग्राम सिकंदरपुर में धार्मिक आस्था से जुड़ा एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसने ग्रामीणों की भावनाओं को उद्वेलित कर दिया है। गांव में स्थित गाटा संख्या 1651, जो राजस्व अभिलेखों में खलिहान के रूप में दर्ज है, विगत एक शताब्दी से अधिक समय से होलिका दहन स्थल के रूप में प्रयुक्त होता रहा है। यह स्थान स्कूल परिसर से पंचायत भवन तक फैला हुआ है और ग्रामवासियों की सामूहिक धार्मिक परंपराओं का केंद्र रहा है।
     आपको बता दें कि, ग्रामीणों का कहना है कि, प्रत्येक वर्ष फाल्गुन मास में यहां पूरे विधि-विधान से होलिका दहन किया जाता है। होली का यह पर्व केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। ऐसे में इस पावन स्थल के साथ छेड़छाड़ को लेकर लोगों में गहरी नाराजगी है।
    आरोप है कि, गांव के ही कुछ लोगों—अकबर अली, असलम अली, मुस्तकीम अली और शाहरूख अली—तथा उनके परिवार की महिलाओं द्वारा होलिका दहन हेतु एकत्र की गई लकड़ियों को उठाकर समीप रखे खाद (घूरा) के ढेर में फेंक दिया गया। बताया जा रहा है कि खेत खाली न होने के कारण खाद अस्थाई रूप से वहां रखा गया था। इस घटना से ग्राम पंचायत के लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
      ग्रामीणों का कहना है कि, यह स्थल केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि गांव की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। सैकड़ों वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में व्यवधान उत्पन्न करना सामाजिक सौहार्द के लिए भी उचित नहीं है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
     गांव के वरिष्ठजनों ने अपील की है कि, सभी पक्ष संयम बरतें और आपसी संवाद के माध्यम से समाधान निकालें। त्योहारों का उद्देश्य समाज में प्रेम, भाईचारा और सौहार्द को बढ़ावा देना है। प्रशासनिक हस्तक्षेप से स्थिति स्पष्ट होने और पारंपरिक स्थल की मर्यादा बनाए रखने की उम्मीद जताई जा रही है।