रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली। क्षेत्र के तौली ग्राम पंचायत में ग्राम प्रधान सत्यवती और उनके प्रतिनिधि विनोद कुमार धोबी के नेतृत्व में आयोजित बैलगाड़ी प्रतियोगिता ने एक बार फिर ग्रामीण परंपराओं को जीवंत कर दिया। होली से पूर्व आयोजित होने वाली इस पारंपरिक प्रतियोगिता का यह दूसरा वर्ष है, जिसमें आसपास के कई गांवों से प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
     आपको बता दें कि, रविवार को आयोजित इस प्रतियोगिता में स्थानीय किसानों के साथ-साथ दूरस्थ गांवों से भी प्रतिभागी अपनी सजी-धजी बैलगाड़ियों के साथ पहुंचे। बैलों को पारंपरिक तरीके से सजाया गया था—घुंघरू, रंगीन कपड़े और आकर्षक सजावट ने पूरे आयोजन को मनमोहक बना दिया।
      प्रधान प्रतिनिधि विनोद कुमार धोबी ने बताया कि, प्रतियोगिता का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि ग्रामीण संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि, आधुनिकता के इस दौर में ऐसी परंपराएं कहीं खो न जाएं, इसलिए हर वर्ष होली से पहले इसका आयोजन किया जाता है।
मेले जैसा दिखा गांव: प्रतियोगिता को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ उमड़ी। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में, बच्चे उत्साह से भरे और बुजुर्ग पुरानी यादों में खोए नजर आए। ढोल-नगाड़ों और जयघोष के बीच जब बैलगाड़ियां दौड़ीं तो पूरा माहौल रोमांच से भर उठा।
       गांव का परिवेश मानो एक मेले में बदल गया—खानपान की छोटी दुकानों, आपसी मेलजोल और उत्सवी वातावरण ने आयोजन को यादगार बना दिया।
परंपरा से जुड़ रही नई पीढ़ी: ग्रामीणों का कहना है कि, इस तरह के आयोजनों से आपसी भाईचारा मजबूत होता है और सामाजिक एकता को बढ़ावा मिलता है। युवा वर्ग भी बढ़-चढ़कर भाग ले रहा है, जिससे उन्हें अपनी जड़ों और ग्रामीण जीवन की परंपराओं को समझने का अवसर मिलता है।
      आयोजकों ने विजेताओं को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया और भविष्य में प्रतियोगिता को और भव्य रूप देने की बात कही।
       इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि, गांवों की परंपराएं आज भी जीवंत हैं और सामूहिक प्रयास से उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखा जा सकता है।