शिवाकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: जनपद रायबरेली के महराजगंज क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत बावन बुजुर्ग बल्ला के पवित्र बबुरिहा धाम कुटी के तीसरे महंत, पूज्य संत लक्ष्मण दास जी महाराज (लल्लू दास) का शुक्रवार-शनिवार की रात हृदय गति रुक जाने से इलाज के दौरान निधन हो गया। वे 57 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। जैसे ही उनके गोलोक गमन की सूचना मिली, वैसे ही बबुरिहा धाम स्थित उनकी तपोस्थली कुटी पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। न केवल रायबरेली जनपद बल्कि आसपास के कई जिलों से उनके अनुयायी, शिष्य और श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त करने लगे।
     आपको बता दें कि, पूज्य महंत लक्ष्मण दास जी महाराज का संपूर्ण जीवन धर्म, भक्ति और मानव सेवा के लिए समर्पित रहा। उनके सान्निध्य में बबुरिहा धाम के दूसरे महान संत अवसान दास जी महाराज के ऐतिहासिक 75वें विशाल भंडारे का सफल आयोजन हुआ था। उनके मार्गदर्शन से हजारों श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त कर अपने जीवन को नई दिशा दी।
     महंत जी अपने प्रवचनों में अक्सर कुटी के द्वितीय गद्दीधारी बाबा अवसान दास जी महाराज की महिमा का वर्णन करते थे। वे बताते थे कि, बाबा अवसान दास जी रामचरितमानस के अद्वितीय विद्वान थे और अयोध्या में जब भी संतों के बीच शास्त्रार्थ में कठिन प्रश्न उठते थे, तब उन्हें विशेष रूप से आमंत्रित किया जाता था, जहां वे अपने ज्ञान से सभी को संतुष्ट करते थे।
      महंत लक्ष्मण दास जी महाराज का इस प्रकार अल्पायु में निधन धाम ही नहीं, बल्कि पूरे समाज और उनके अनुयायियों के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनके स्नेह, आशीर्वाद और दिव्य वाणी को श्रद्धालु सदैव अपने हृदय में संजोए रखेंगे।
     शोक व्यक्त करने वालों में क्षेत्र के अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवार एवं श्रद्धालुओं को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।
     अंत में श्रद्धालुओं ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा—"शरीर नश्वर है, आत्मा अमर है।"
महंत जी भले ही आज हमारे बीच भौतिक रूप में न हों, किंतु उनके आदर्श, शिक्षाएं और आशीर्वाद सदैव समाज का मार्गदर्शन करते रहेंगे।